वृद्ध महिला ने 73 साल की उम्र में जुड़वां बच्चों को दिया जन्म
आंध्र प्रदेश के गुंटूर ज़िले में एक 73 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया है।
महिला का नाम येरामति मंगायम्मा है और उन्होंने बुधवार सुबह 10.30 बजे सी-सेक्शन के जरिए (यानी सिजेरियन) इन बच्चों को जन्म दिया है।इनका ऑपरेशन करने वाली डॉक्टर उमा शंकर ने बीबीसी तेलुगु को बताया, मां और जुड़वां बच्चियां दोनों स्वस्थ हैं. बच्चियां अभी अगले 21 दिन डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगी।उम्मीद की जा रही है कि यह महिला जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली सबसे उम्रदराज़ महिला होंगी क्योंकि सबसे अधिक उम्र में बच्चे को जन्म देने का आधिकारिक रिकॉर्ड स्पेन की मारिया डेल कार्मेन बॉउसाडा लारा के नाम है, जिन्होंने साल 2006 में 66 साल की उम्र में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था।हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि यह रिकॉर्ड भारत के ओमकारी पनवार के नाम है।उनके बारे में माना जाता है कि साल 2007 में उन्होंने 70 साल की उम्र में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था।
वर्षों तक अस्पतालों के चक्कर लगाता रहा दंपति
मंगायम्मा ने खुशी जताते हुए कहा, "लोग मुझे गोदरालु (नि:संतान महिला) कहते थे. मैंने बहुत दर्द सहा है. इसलिए मैंने बच्चा जन्म देने का फ़ैसला किया. मेरी ज़िंदगी में यह सबसे खुशी का पल है."
महिला के पति यरामति सीताराम राजाराव ने कहा, "अब मैं खुश हूं। ये सब इन डॉक्टरों की वजह से संभव हो सका. हमने कई अस्पतालों में कई तरीके अपनाए। फिर हम एक बार और कोशिश करने के लिए इस अस्पताल में आए। यहां आने के दो महीने के भीतर ही मेरी पत्नी प्रेग्नेंट हो गईं. हम बीते 9 महीने से इस अस्पताल में ही हैं। लोग हमे गोडराजू (नि:संतान व्यक्ति) कहते थे. अब यह ख़त्म हो गया है। हम इन दोनों बच्चियों की बढ़िया देखरेख करेंगे।"यह दंपति पूर्व गोदावरी ज़िले के नेलापर्तिपडु गांव के रहने वाले है।इनकी शादी 22 मार्च 1962 को हुई थी. बच्चे की चाहत में ये दंपति कई वर्षों तक अस्पतालों का चक्कर लगाता रहा,कुछ दिनों पहले जब इस दंपति के इलाके की ही एक 55 वर्षीय महिला ने आईवीएफ के ज़रिए बच्चे को जन्म दिया, तब इन्होंने भी आईवीएफ तकनीक के ज़रिए एक बार और कोशिश करने का फ़ैसला किया।
बीते वर्ष यह दंपति गुंटूर की इस क्लीनिक में पहुंचा. डॉक्टर उमा शंकर ने सभी टेस्ट करने के बाद उनका इलाज शुरू किया।
क्या है तकनीक?
महिलाओं में बढ़ती उम्र के साथ अंडाणुओं की संख्या कम होनी शुरू हो जाती है और 35 साल के बाद तो बहुत ही तेज़ी से कम होती है।
मंगायम्मा मीनोपॉज़ से गुज़र चुकी थीं. लिहाज़ा उनके लिए बिना किसी चिकित्सीय मदद के गर्भवती होना संभव नहीं था।
गर्भधारण के लिए इस दंपति ने एक डोनर से अंडाणु लिया और आईवीएफ तकनीक के ज़रिए उनके पति सीताराम राजाराव के शुक्राणु से उसका मिलान कराया गया, इसके बाद बने भ्रूण को मंगायम्मा के गर्भ में रोपित कर दिया गया।
उम्रदराज़ महिलाओं में गर्भधारण एक जटिल प्रक्रिया है और ऐसे मामले में अधिक सावधानी की ज़रूरत पड़ती है।