Posts

Showing posts from December, 2019

पश्चिम बंगाल के पांच जिलों में हिंसक प्रदर्शन के बाद इंटरनेट सेवा बंद

Image
पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों के मद्देनजर पांच जिलों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गयी हैं। इस संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार ने खासकर सोशल मीडिया पर अफवाहों और फर्जी खबरों पर रोक लगाने के लिए यह फैसला लिया गया है।  जहां इंटरनेट सेवाएं निलंबित की गई है उसमें मालदा, मुर्शिदाबाद, हावड़ा, उत्तरी 24 परगना में और दक्षिणी 24 परगना के कई हिस्सों में इंटनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। अधिकारी ने कहा, ''बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कुछ सांप्रदायकि शक्तियां हिंसक प्रदर्शन कर रही हैं। स्थिति के मद्देनजर प्रशासन ने राज्य के पांच जिलों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। बता दें कि पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हुए। हावड़ा-मुर्शिदाबाद में प्रदर्शनकारियों ने बसें, स्टेशन, दुकानें और टोल प्लाजा फूंक दी। मुर्शिदाबाद जिले के कृष्णपुर स्टेशन पर भीड़ ने पांच खाली ट्रेनों को आग के हवाले कर दिया। लालगोला स्टेशन पर रेल पटरियों पर तोड़फोड़ की गई।  जिले के सुती में, प्रदर्शनकारियों ने तीन...

ईपीएफओ का छापा

कानपुर।   केस्को संविदा कर्मचारियों के 13 करोड़ रुपये पीएफ घोटाले में सोमवार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की टीम ने केस्को मुख्यालय पर छापा मारा। टीम ने पांच घंटे तक फाइलें खंगाली। जांच टीम को कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। केस्को में वर्ष 2000 से वर्ष 2014 के बीच तैनात 531 संविदा कर्मचारियों का एक भी पैसा न तो भविष्य निधि में जमा किया गया और न ही उन्हें ईएसआइ का लाभ मिला। ये सभी कर्मचारी दस सेवा प्रदाता कंपनियों की ओर से दिए गए थे। संविदा कर्मचारी संगठन केस्को के अनुमान के मुताबिक पीएफ में जमा नहीं की गई रकम 13 करोड़ के आसपास है। नियमों के अनुसार केस्को अधिकारियों की ये जिम्मेदारी थी कि वे निश्चित करते कि ठीकेदार ने पीएफ व ईएसआई जमा किया है या नहीं। ऐसा न करने पर ठीकेदार का भुगतान रोक देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। संविदा कर्मचारी संगठन केस्को के महामंत्री दिनेश सिंह भोले की शिकायत पर ईपीएफओ ने पिछले दिनों सुनवाई करते हुए केस्को को पीएफ अकाउंट आवंटित कर दिया था। केस्को में हुए इस बड़े घोटाले को दैनिक जागरण ने न केवल प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया, बल्कि इसके अन...

स्टडी में खुलासाहुआ है कि शिफ्ट में काम करना हो सकता है खतरनाक

आजकल के बढ़ रहे कम्पटीशन में हर प्राइवेट कंपनी अपना काम टाइम पर या टाइम से पहले पूरा करना चाहती है. टार्गेट पूरा करने के लिए कंपनियां अब 24 घंटे काम करने पर जोर दे रही हैं. 24 घंटे ऑफिस चलने का मतलब शिफ्ट में काम करना. यानि सुबह, शाम और रात की शिफ्ट. जिसमें बड़ी संख्या में एंप्लॉयी काम करते हैं. ज्यादातर ऑफिस में ये शिफ्ट हर हफ्ते बदलती है. पर क्या आप जानते हैं कि हर हफ्ते शिफ्ट में होने वाला बदलाव आपकी बॉडी पर क्या असर डालता है? कभी सुबह, कभी शाम तो कभी रात. अगर आप भी इस तरह की शिफ्ट में काम करते हैं तो ये आपकी सेहत के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है. इससे न सिर्फ मोटापा बल्कि डायबिटीज और कई तरह की दिमागी बीमारियां भी हो सकती हैं. एक स्टडी में इस बात की जानकारी सामने आई है की शिफ्ट में काम करने वालों में 33 फीसदी ज्यादा तनाव और डिप्रेशन पाया जाता है . वहीं 9 से 5 बजे वाली शिफ्ट में काम करने वालों या एक फिक्स शिफ्ट में काम करने वालों में बहुत कम तनाव पाया गया. मानसिक बीमारियों का खतरा शिफ्ट में काम करने वाले लोगों को कई तरह की दिमागी बीमारियों का भी खतरा होता है. स्टडी के मुताबिक 28 फीसदी ल...

21 अधिकारियों से भू-उपयोग परिवर्तन मामले में जवाब तलब

ग्रेटर नोएडा।   ग्रेटर नोएडा वेस्ट में उद्योग की जमीन का भू-उपयोग बदल कर आवासीय करने वाले 21 अधिकारियों पर प्रदेश सरकार ने शिकंजा कस दिया है। एसीईओ की जांच रिपोर्ट में इन अधिकारियों को दोषी माना गया था। एक सप्ताह के अंदर सभी से जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मास्टर प्लान 2021 में ग्रेटर नोएडा वेस्ट की जमीन उद्योगों के लिए आरक्षित थी। बसपा शासनकाल में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की मंजूरी के बिना जमीन का भू-उपयोग बदलकर आवासीय कर दिया गया। बताया जाता है कि यह सारा खेल तत्कालीन बसपा सरकार के इशारे पर हुआ था। 2012 में प्रदेश में सपा सरकार बनने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, रातों-रात भू-उपयोग परिवर्तन प्राधिकरण ने जमीन बिल्डरों को बेच दी। बिल्डरों ने लाखों फ्लैट की बुकिंग तक कर ली। हालांकि, मामले का पर्दाफाश होने के बाद फ्लैट खरीदारों ने एनसीआर प्लानिंग बोर्ड कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर इसे मंजूरी दिला दी, लेकिन 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद मामले की जांच शुरू हुई। गजराज आदि ने इस मामले में हाई कोर...

विरोध में अधिवक्ता हड़ताल पैर , डी एम ऑफिस के बहार धरना

मेरठ : कचहरी परिसर से कामर्शियल कोर्ट को स्थानांतरित किए जाने के विरोध में सोमवार को भी अधिवक्ता हड़ताल पर रहे। हड़ताल के चलते पूरे कचहरी परिसर में कामकाज ठप रहा। गुस्साए अधिवक्ताओं ने कलक्टेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। मांग पूरी न होने पर नारेबाजी कर डीएम कार्यालय में धरना दिया। धरने के बाद मुख्यमंत्री को सम्बोधित एक ज्ञापन डीएम को दिया। डीएम ने इस मामले को लेकर मंगलवार को फिर से बैठक करने का आश्वासन दिया। जिसके बाद ही अधिवक्ता धरने से उठे। उधर, मंगलवार को मेरठ समेत पश्चिमी उप्र के अधिवक्ता इस मुद्दे को लेकर हड़ताल पर रहेंगे। सोमवार सुबह अधिवक्ता पंडित नानक चंद सभागार से मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मांगेराम व महामंत्री नरेश दत्त शर्मा के नेतृत्व में कलक्टेट पहुंचे। अपनी मांग को लेकर कुछ देर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इसके बाद डीएम अनिल ढींगरा से वार्ता के लिए पहुंचे। अधिवक्ताओं ने अपनी मांग को डीएम के समक्ष रखा। अधिवक्ता जहां कोर्ट को स्थानांतरित न करने की मांग पर अड़े रहे। वहीं, डीएम का कहना था कि उनके पास कोई दूसरा विकल्प स्थान का नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्णय अवस्थापना समित...

पाकिस्तान घूमकर आने वाले रहीसुद्दीन पुलिस की गिरफ़्त में

फर्जी पासपोर्ट से पाकिस्तान घूम आया अब पुलिस ने पकड़ा  मेरठ।  फर्जी नाम से पासपोर्ट बनवाकर पाकिस्तान घूमकर आने वाले रहीसुद्दीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपित ने दो पासपोर्ट बनवा लिए थे। एलआइयू की जांच में पर्दाफाश होने के बाद आरोपित के खिलाफ देहलीगेट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। देहलीगेट के कोठी अतानस निवासी रहीसुद्दीन पुत्र सुलेमान ने 2009 में एक पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। दो माह बाद पता चला कि रहीसुद्दीन का आवेदन निरस्त कर दिया। तभी उसने रहीसुद्दीन शेख नाम से दूसरे पासपोर्ट के लिए आवेदन किया, जिस पर विभाग ने पासपोर्ट जारी कर दिया। उसके बाद रहीसुद्दीन का पहले से आवेदन किए प्रार्थना पत्र पर भी पासपोर्ट जारी हो गया। दो पासपोर्ट जारी कराने के बाद रहीसुद्दीन ने पाकिस्तान के पांच चक्कर लगाए। पाकिस्तान के लाहौर में रहीसुद्दीन की दो बहनें रहती हैं। तभी एलआइयू की टीम ने रहीसुद्दीन पर नजर रखी। उसके कागजात की पड़ताल की गई। जांच में आया कि उसके दो पासपोर्ट जारी किए गए है। एलआइयू सीओ ने मामले की जानकारी एसएसपी को दी। कप्तान ने एसपी क्राइम से मामले की जांच कराई। पता च...