स्टडी में खुलासाहुआ है कि शिफ्ट में काम करना हो सकता है खतरनाक

आजकल के बढ़ रहे कम्पटीशन में हर प्राइवेट कंपनी अपना काम टाइम पर या टाइम से पहले पूरा करना चाहती है. टार्गेट पूरा करने के लिए कंपनियां अब 24 घंटे काम करने पर जोर दे रही हैं. 24 घंटे ऑफिस चलने का मतलब शिफ्ट में काम करना. यानि सुबह, शाम और रात की शिफ्ट. जिसमें बड़ी संख्या में एंप्लॉयी काम करते हैं.


ज्यादातर ऑफिस में ये शिफ्ट हर हफ्ते बदलती है. पर क्या आप जानते हैं कि हर हफ्ते शिफ्ट में होने वाला बदलाव आपकी बॉडी पर क्या असर डालता है?


कभी सुबह, कभी शाम तो कभी रात. अगर आप भी इस तरह की शिफ्ट में काम करते हैं तो ये आपकी सेहत के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है. इससे न सिर्फ मोटापा बल्कि डायबिटीज और कई तरह की दिमागी बीमारियां भी हो सकती हैं.


एक स्टडी में इस बात की जानकारी सामने आई है की शिफ्ट में काम करने वालों में 33 फीसदी ज्यादा तनाव और डिप्रेशन पाया जाता है . वहीं 9 से 5 बजे वाली शिफ्ट में काम करने वालों या एक फिक्स शिफ्ट में काम करने वालों में बहुत कम तनाव पाया गया.


मानसिक बीमारियों का खतरा


शिफ्ट में काम करने वाले लोगों को कई तरह की दिमागी बीमारियों का भी खतरा होता है. स्टडी के मुताबिक 28 फीसदी लोग ऐसे है जो बदलती शिफ्ट में काम करते है और वे सभी मानसिक बीमारी से पीड़ित है.


स्टडी करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार शिफ्ट में बदलाव होने से लोगों की सोने और जागने की आदत पर असर पड़ता है. हर हफ्ते होने वाले बदलाव को हमारा शरीर जल्दी एडजस्ट नहीं कर पाता जिससे लोग चिड़चिड़े होने लगते हैं.


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