संक्रमण रोकने के लिए 21 दिन का ही लॉकडाउन क्यों?
जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना नाम की महामारी से लड़ने के लिए पूरे देश में 21 दिन के लॉक डाउन का एलान किया तो क्या आपने इस बात पर ध्यान दिया कि उन्होंने 21 दिन की अवधि क्यों चुनी. सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों ने कोरोना से लड़ने के लिए अपने देश में जो लॉक डाउन किया है, उसकी अवधि भी 21 दिन ही रखी गयी है.विज्ञान के सिद्धांत और महामारी से लड़ने की क्षमता विकसित करने या वायरस की मारक क्षमता को घटाने के हिसाब से 21 दिन की अवधि का बड़ा योगदान है।
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए 21 दिन के लॉकडाउन की वजह यह है कि कोविड 19 का वायरस तीसरे हफ्ते में कोहराम मचा देता है. लोगों में कोरोना का संक्रमण नहीं फैले, इसलिए उन्हें घर में रहने के लिए कहा गया है. कई विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक की स्टडी के हिसाब से तीसरे हफ्ते में कोरोना का वायरस सबसे ज्यादा खतरनाक साबित होता है। कोरोना संक्रमण के पांचवें हफ्ते के बाद यह वायरस कमजोर पड़ जाता है, इस वजह से 21 दिनों का लॉकडाउन किया गया है। चीन, इटली, स्पेन और अमेरिका जैसे देशों में कोरोना वायरस महामारी का रूप ले चुका है और इससे काफी लोगों की मौत हुई है. इन देशों में की गई स्टडी में पता चला है कि कोरोना वायरस की तबाही मचाने का पैटर्न क्या है. अब तक किये गए अध्ययन के अनुसार तीसरे हफ्ते में कोरोना का संक्रमण सबसे अधिक तेजी से होता है. इस हिसाब से विशेषज्ञ मानते हैं कि देश में कोरोना के वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए 21 दिन का लॉक डाउन बहुतजरूरी कदम है. भारत के अलग-अलग प्रदेश में कोरोना का वायरस एक ही समय में नहीं पहुंचा है, इसलिए अभी यहां इसके संक्रमण में तेजी आने का ट्रेंड पता नहीं है. इस लॉक डाउन का दूसरा पहलू है कोरोना वायरस से आम लोगों को बचाना और संक्रमित लोगों की पहचान कर उनका इलाज करना. कोरोना वायरस का संक्रमण चक्र 14 दिनों का है, इस दौरान किसी व्यक्ति में कोरोना के लक्षण दिख सकते हैं किसी में नहीं भी दिख सकते हैं. दोनों को कवर करने के लिए 21 दिन का वक्त काफी है. लॉकडाउन की अवधि में अगर सभी लोग अपने-अपने घर में रहें तो इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि 14 दिनों के अंदर संक्रमित लोगों में इसके लक्षण सामने आ जाएंगे.