दिव्यांग बच्चों का होगा ऑनलाइन मूल्यांकन


जिले में वैश्विक कोरोना महामारी से बचाव के बीच ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे दिव्यांग बच्चों का अब मूल्यांकन भी ऑनलाइन ही किया जाएगा। ताकि बच्चों में शैक्षणिक उपलब्धि को आंका जा सके। इस बावत बिहार शिक्षा परियोजना के समावेशी शिक्षा संभाग द्वारा जूम एप के माध्यम से ऑनलाइन बैठक कर जिलास्तरीय अधिकारियों को ऑनलाइन मूल्यांकन के रणनीति की जानकारी दी गई। इसकी जानकारी देते हुए जिला समावेशी शिक्षा समन्वयक श्रीनारायण सिंह ने बताया कि जिले में ऑनलाइन अध्ययनरत सभी कोटि के दिव्यांग बच्चों को ऑनलाइन मूल्यांकन कार्य 21 से 30 सितम्बर तक किया जाएगा। इसके लिए राज्य कार्यालय द्वारा ऑनलाइन ही प्रश्न पत्र उपलब्ध करायी जाएगी। प्रखंड स्तर पर कार्यरत संसाधन शिक्षक, समावेशी शिक्षा के संसाधन सेवी, पुनर्वास विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन अध्ययनरत दिव्यांग बच्चों का ऑनलाइन मूल्यांकन किया जाएगा। ऑनलाइन मूल्यांकन का रिपोर्ट आदि कार्य हरहाल में आठ अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा। ऑनलाइन मिटिंग में राज्य कार्यालय के प्रतिनिधि अजय राय, अवनीश रंजन, शिवशंकर प्रसाद, नंदकिशोर रजक, भारत भूषण पांडेय के अलावा जिला समावेशी शिक्षा समन्वयक श्रीनारायण सिंह, संसाधन शिक्षक कृष्ण मुरारी ठाकुर आदि थे।


ऑनलाइन मूल्यांकन में शामिल होंगे 117 बच्चे


जिले में प्रखंड स्तर पर 21 सितम्बर से शुरु होने वाली ऑनलाइन मूल्यांकन में 117 दिव्यांग बच्चे भाग लेंगे। इसकी जानकारी देते हुए जिला समावेशी शिक्षा समन्वयक ने बताया कि कोरोना महामारी काल में जिले में विभिन्न कोटि के कुल 117 बच्चे ऑनलाइन अध्ययनरत है।


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आज दिनांक 19 फरवरी 2026 को कनोहर स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय, मेरठ की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा सात दिवसीय विशेष शिविर का शुभारंभ श्री राम सरस्वती शिशु मंदिर, निकट रामलीला ग्राउंड, दिल्ली रोड पर किया गया। शिविर के प्रथम दिवस स्वयंसेविकाओं ने शिविर स्थल पर पहुंचकर साफ-सफाई एवं बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की। इसके पश्चात लक्ष्य गीत एवं प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो० (डा०) किरण प्रदीप मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम अधिकारी डा० पूजा राय ने राष्ट्रीय सेवा योजना के उद्देश्य एवं लक्ष्य पर प्रकाश डालते हुए सात दिवसीय विशेष शिविर की प्रस्तावित गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सेवा योजना ‘शिक्षा के माध्यम से सेवा’ के सिद्धांत पर कार्य करते हुए छात्राओं में सामुदायिक सेवा की भावना, व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र निर्माण को प्रोत्साहित करती है तथा युवाओं को सामाजिक समस्याओं के समाधान, राष्ट्र निर्माण एवं आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करती है। मुख्य अतिथि प्रो० (डा०) किरण प्रदीप ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है। तकनीकी ज्ञान, सॉफ्ट स्किल्स एवं व्यावहारिक दक्षताओं के माध्यम से युवा आत्मविश्वास के साथ अपनी आजीविका अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने छात्राओं को अपनी रुचि के क्षेत्र में निरंतर कौशल वृद्धि करने तथा नए-नए कौशल सीखने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उत्तरदायित्व एवं सेवा भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया। महाविद्यालय के पुस्तकालय विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. राखी त्यागी ने कहा कि यह विशेष शिविर छात्राओं के लिए समाज सेवा के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास का उत्कृष्ट अवसर है। शिविर के अंतिम सत्र में ‘सड़क सुरक्षा’ विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें स्वयंसेविकाओं ने सड़क सुरक्षा का संदेश देते हुए आकर्षक पोस्टर बनाए। प्रथम दिवस माही, तनु, सविता, स्नेहा, सोफिया, लाएबा, खुशी सहित कुल 50 स्वयंसेविकाओं ने सक्रिय सहभागिता की। शिविर का संयोजन एवं संचालन कार्यक्रम अधिकारी डा० पूजा राय द्वारा किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में श्री संजीव माहेश्वरी एवं श्री सुरेश चंद्र प्रजापति का विशेष सहयोग रहा।