कविता
आज की परिस्थिति को पंक्तियों के माध्यम से रखने की मेरी एक कोशिश👇🏻
Sakshi Sharma
(रूहाक्षी)
ईमानदार या जिम्मेदार?
चलो, आज फैसला कर ही लिया जाए,
सरकार को तो बहुत गाली दे ली, क्यो ना अब ईमानदारों के बारे में कुछ कहा जाए,
महामारी के इस दौर में, किसने अपनी ईमानदारी निभाई है,
दवाई लेने भेजा किसी को तो आम जनता ने सबसे महँगी वही दवाई पाई है,
40 से 50 रु का मिलने वाला नारियल पानी...100 से 150 रु में बेचा जाता है,
एम्बुलेंस के द्वारा कुछ ही दूरी का किराया हज़ारो में मांगा जाता है,
700 -800 का मिलने वाला ऑक्सिमेटर, 1500-2000 का बतलाते हैं,
जब पता चला निम्बू है जरूरी तो उसकी भी कीमत आसमान पे पहुचाते हैं,
इतनी बुरी हालत कर रखी है, ये सुरक्षा के ठेकेदारों ने,
परिजनों के लिए भेजी चीज खुद ही खा जाते हैं अस्पतालों में,
ना जाने कितने अपने छूट गए,
ना जाने कितने सपने टूट गए,
तुम्हारी इन लापरवाही से,
क्या खुश रह सकोगे ?? अपनी पैसों की इन वाहवाही से??
इतना प्रलय मचा है...आखिर अब तो आंखे खोलो,
मेहरबानी करो, अपनी जिम्मेदारियो से यूं ना मुह मोड़ो,
क्या कहा जाए ,तुमको
अब तुम ही बतलाओ,
घर-परिवार तुम्हारा भी है,
अब तो ये सब रूकवाओ
समजो अपनी जिम्मेदा
री,
समय रहते निभा लो अपनी ईमानदारी
