कविता
*स्वरचित कविता*
*(सासू माँ)*
माँ तूने मुझे जन्म दिया,
पर जिंदगी सास ने बनाई है।
तूने तो ठुकराया माँ,
ये कहकर बेटी परायी हैं।
माँ तूने सिर्फ जताया प्यार,
सासू करती रोज लड़ाई हैं।
माँ तेरे प्यार ने बिगाड़ा मुझे,
उसकी लड़ाई में भी सच्चाई है।
लड़ाई-झगड़े से घर बिगाड़े,
ये करती नार पराई हैं।
उसने सौंपा अपना बेटा,
सौंपी सारी कमाई हैं।
ना देखी घर-जमीन उसने,
सारी दौलत मुझ पर लुटाई हैं।
जब हो जाती हूँ माँ मैं बीमार,
तो करवाती मेरी दवाई हैं।
माँ तेरे घर सिर्फ खेली-कूदी,
जिम्मेदारी सास ने सिखाई हैं।
माँ उसकी बात भले कड़वी हो,
अच्छी बातें भी उसने बताई है।
अपनी माँ लागे सबको प्यारी,
फिर भी सास को मिलती बुराई है।
वो सिर्फ एक सासू माँ नही दोस्तो,
तुम्हारी जिंदगी में देवी बनकर आई है।
*सुषमा पाल*
*(पुर्व छात्र संघ कोषाध्यक्ष)*
(श० म० पा० महिला
स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मेरठ)।
