परिवर्तनसंस्था द्वारा फुले-अम्बेडकर रेव्युलेशन सेमिनार का आयोजन किया गया
फुले-अम्बेडकर जयंती को समर्पित अपार चैम्बर बुढ़ाना गेट मेरठ पर परिवर्तनसंस्था द्वारा *फुले-अम्बेडकर रेव्युलेशन सेमिनार* का आयोजन किया गया, अध्यक्षता संस्था के केन्द्रियाध्यक्ष वेदवीर सिंह आदिवासी ने की तथा संचालन केंद्रीय प्रचारसचिव सोनू सिंह अम्बेडकर एवं जिलाध्यक्ष पवन वैद ने किया।
बतौर मुख्यातिथि संस्था प्रमुख चौ0 विनोद अम्बेडकर की गरिमामयी उपस्थित रही। इस अवसर पर श्रीमती पिंकी अम्बेडकर (अध्यक्ष महिलाविंग ), ई0 नबाब सिंह (दलित साहित्यकार) ई0 उधम सिंह जी, के0 पी0 सिंह दलित चिंतक विशिष्ठ अतिथि रहे
सेमिनार में बतौर मुख्यातिथि संस्था प्रमुख चौ0 विनोद अम्बेडकर ने कहाकि ज्योतिबा फुले और बाबा साहब अम्बेडकर ने जातिगत आधार पर हिन्दू धर्म मे व्याप्त छुवा-छूत, ऊंच-नीच की भावना को समाप्त कर शिक्षा समाज के अंतिम पायदान के व्यक्ति की पहुंच में आ सके तथा समता मूलक समाज की स्थापना सभव हो इसके लिये रेव्युलेशन (क्रांति) की। जिसका असर उनके जीते-जी आना भी शुरू हो गया था। आज समाज मे जो बदलाव और शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति हम देख पा रहे है वह फुले-अम्बेडकर रेव्युलेशन की ही बदौलत है। उन्होंने आगे कहाकि अब यह आंदोलन गतिहीन सा मालूम पड़ रहा है क्योंकि हमने इसकी बागडौर जिन हाथों में सौंपी थी वह उसे सुरक्षित नही रख पाई। अब समाज को एकजुट कर पुनः सत्ता में वापसी के लिये हमे मायावती एंड फैमिली का मोह त्यागकर फुले अम्बेडकर आंदोलन की समझ रखने वाले नए सामाजिक ईमानदार नेतृत्व का रुख करना होगा। क्योंकि जिस सामाजिक मूवमेंट को फुले ने चलाया, अम्बेडकर ने उसे तीव्र गति से आगे बढ़ाया, कांशीराम ने उसे राजनैतिक जनांदोलन बनाया जिसकी बदोलत मायावती भारत के सबसे बड़े सूबे यूपी की चार बार CM बनी। लेकिन मायावती ने उसे नाकाबिल परिवार एवं धन की खातिर नामेट कर दिया।
विशिष्ठ अतिथि महिलाविंग की अध्यक्ष श्रीमती पिंकी अम्बेडकर ने कहाकि फुले-अम्बेडकर को महान बनाने में तथा उनके द्वारा जो क्रांति की गई उसमे उनकी संगनी माता सावित्रीबाई फुले एवं माता रमाबाई का बहुत बड़ा योगदान था जिसकी चर्चा हम नही करते। सावित्रीबाई ने ज्योतिबा का साथ निभाते हुवे अपने बच्चे पैदा ना करने के फुले के फैसले को स्वीकार किया तो वही रमाबाई ने अपने चार बच्चे बाबा साहब के क्रांति को भेंट चढ़ा दिए और हर कदम उनका सहयोग किया। ऐसी त्याग मूर्ति अगर फुले अम्बेडकर के जीवन मे ना होती तो वो शायद इतनी ऊंचाइयों को ना छूते।
सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे संस्था के अध्यक्ष वेदवीर सिंह आदिवासी जी ने कहाकि दलितों के संपूर्ण उत्थान के लिये ज्योतिबाफुले ने सामाजिक क्रांति का जो आंदोलन चलाया उसे बाबा साहब अम्बेडकर ने दुगनी गति से आगे बढ़ाया, बाबा साहब के बाद आंदोलन की बागडौर बाद में मान्यवर कांशीराम ने संभाली, अब उनके बाद वर्तमान में उसी आंदोलन को दलितों में एकमात्र सामाजिक ईमानदार, त्यागी ,बलिदानी, साहसी तथा फुले अम्बेडकर मिशन की गहरी समझ रखने वाले निरन्तर गतिशील एकमात्र दलित नेता है परिवर्तनसंस्था के प्रमुख चौ0 विनोद अम्बेडकर चला रहे है। हमे बिना विलम्भ किये उनके मार्गदर्शन में एकजुट होना चाहिये ताकि फुले अम्बेडकर मूवमेंट को पुनः गतिमान किया जा सके
सेमिनार में मुख्यरूप से मुकेश राव, मनोज वर्मा, अनुज कुमार, बिनेश पार्चा, दीपक विराह, सुरेंद्र मास्टरजी, सोनू टांक, सुभम कुमार, करण कुमार, मोहित मोंगिया, संज
य सिंह, प्रताप सिंह, राजिंदर कुमार, विजय कुमार, कु0 अन्नू चौटाला, कु0 कनक अम्बेडकर, कुंवरवीर सिंह, मुन्नू हडाला, हरप्रकाश राव, प्रमोद नागवंसी, गुलशन कल्याण आदि स्त्री पुरूष शामिल हुवे







