मैक्स हॉस्पिटल वैशाली ने मेरठ में शुरू की ओपीडी सेवा, लिवर के मरीजों को मिलेगा बेहतर इलाज


मेरठ: दिल्ली एनसीआर समेत पश्चिमी यूपी में अपनी स्वास्थ्य सेवा को लेकर प्रसिद्ध मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल वैशाली ने लिवर के मरीजों के लिए मेरठ में ही ओपीडी सेवा शुरू कर दी है. अस्पताल ने विशेष लिवर ट्रांसप्लांट और बायलरी साइंस ओपीडी सेवाओं को मेरठ में फिर से शुरू करने की घोषणा की. जिसके बाद आज से मैक्स मेड सेंटर मेरठ में हर महीने दूसरे और चौथे शुक्रवार को यह ओपीडी शुरू हो जाएगी.


 लोगों की गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो इस मकसद के साथ अस्पताल ने यह ओपीडी सेवा शुरू की है. इस ओपीडी सेवाओं की शुरुआत मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल वैशाली के सीनियर कंसल्टेंट लिवर ट्रांसप्लांट एंड बायलरी साइंस डॉ. राजेश डे, डॉ.तेजल भोय, डॉ. बप्पादित्य हर ने की. इस दौरान उन्होंने हाल के दिनों के एक मरीज रोहित कौशिक के केस का मामला बताया, जिसमें रोहित को उनकी पत्नी ने अपना लिवर दान दिया और रोहित की सफल सर्जरी कर यह लिवर ट्रांसप्लांट किया गया.

 

 डॉ. राजेश डे ने बताया कि रोहित कौशिक नाम का मरीज लिवर सिरोसिस के उच्च स्तर वाले बिलीरुबिन, पीलिया और पेट में पानी भरने की शिकायत को लेकर मैक्स अस्पताल वैशाली में भर्ती हुआ. मरीज की स्थिती को देखकर यह संभावना नहीं थी कि वह आगे जीवित रह पायेगा. मरीज की तेजी से घटती स्थिति को देखते हुए, उसे बचाने का एकमात्र विकल्प लिवर ट्रांसप्लांट था. ऐसे में किसी को अपने लिवर का एक पार्ट दान करवाना वास्तव में एक बेहद चुनौतीपूर्ण और कठिन काम था. लेकिन उनकी पत्नी ने स्वेच्छा से लिवर डोनर बनना चाहा. केस की पूरी स्टडी और परामर्श के बाद, लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी की गई. जिसके बाद डोनर ( पत्नी) तेजी से ठीक हुई और बिना किसी तीमारदार की आवश्यकता के 10 दिनों के भीतर उन्हें छुट्टी दे दी गई. वर्तमान में वह फिट और एक्टिव हैं.


ऑपरेशन के बाद रोहित के लिवर ग्राफ्ट के कामकाज पर बारीकी से नजर रखी गई और धीरे-धीरे ठीक होने के साथ 3 सप्ताह के बाद उन्हें भी छुट्टी दे दी गई और वर्तमान में वह न्यूनतम दवाओं पर है.


  यह मामला इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे सफल तरीके से लिवर डोनर -लिवर ट्रांसप्लांट (एलडीएलटी) एक वरदान बन सकता है. साथ ही लिवर से जूझ रहे अंतिम चरण के मरीजों के लिए जीवन जीने के लिए कारगर सिद्ध हो सकता है. गौरतलब है कि हमारे देश में लीवर की बीमारियों का बहुत बड़ा बोझ है, और जो लोग लिवर की बीमारी के अंतिम चरण तक पहुंच जाते हैं, उनके लिए एकमात्र इलाज लीवर ट्रांसप्लांट है. हालांकि, जागरूकता की कमी के कारण हमारे देश में ब्रेन-डेड अंग दाताओं की भारी कमी है. ऐसे में जीवित संबंधित अंग लिवर डोनर ही एकमात्र संभव विकल्प बचता है.


इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के मुताबिक अकेले यूपी में करीब 10 फीसदी लोग लिवर की किसी न किसी बीमारी से पीड़ित हैं. लिवर की बीमारी हर 5 में से एक भारतीय को प्रभावित कर सकती है. शराब लिवर की अंतिम चरण की बीमारी का प्रमुख कारण है. जिसमें 50 फीसदी सिरोसिस से संबंधित मृत्यु दर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शराब के लिए जिम्मेदार है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लिवर की बीमारी भारत में मृत्यु का दसवां सबसे आम कारण है. 2018 में प्रकाशित डब्ल्यूएचओ के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत में लिवर की बीमारी से होने वाली मौतों की संख्या 264,193 या कुल मौतों का 3% तक पहुंच गई है. 


इस दौरान मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के सीनियर वीपी ऑपरेशंस, डॉ. गौरव अग्रवाल ने कहा कि जनता को उच्च चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करने का हमारा निरंतर प्रयास है. हम लिवर की बीमारी और किसी व्यक्ति के सामान्य दिन-प्रतिदिन के कामकाज पर इसके प्रत्यक्ष प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करते हैं. नॉन ऐल्कॉहॉलिक फैटी लीवर रोग (NAFLD) एक विशिष्ट लिवर की स्थिति है, जो विश्व स्तर पर पुराने लिवर रोग के सबसे सामान्य कारणों में से एक है. मैक्स अस्पताल यह सुनिश्चित करता है कि सर्जरी के दौरान और बाद में मरीज को गहन देखभाल मिले. मेरठ में इस नई ओपीडी से हमें उम्मीद है कि हम ऐसे बहुत से लोगों को लाभान्वित कर सकते हैं, जो इलाज के लिए दूसरे शहरों में जाने में असमर्थ होते हैं. 


मेरठ में ओपीडी सेवा शुरू होने से यह यूनिट शहर और आस-पास के क्षेत्र में अधिक से अधिक मरीजों को सेवा प्रदान करने में सक्षम होगी.

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