पत्रकारों को अपनी फरियाद लेकर अधिकारी के दरवाजे पर पहुंचना पड़ रहा है..
उत्तर प्रदेश में माफिया राज खत्म हो गया है? कानून का राज चल रहा है क्योंकि ये योगीराज चल रहा है... लेकिन दोस्तों इतना सब कुछ होने के बाद भी प्रदेश में पत्रकारों को अपनी फरियाद लेकर अधिकारी के दरवाजे पर पहुंचना पड़ रहा है.. तो सवाल है कि कौन सा माफियाराज खत्म हो गया है? सवाल है कौन से कानून का राज चल रहा है? सवाल है कौन सा योगीराज चल रहा है मेरठ के पत्रकार राहुल राणा ने एक खबर चलाई और एक ऐसे माफिया के बारे में बताया, जो बेखौफ होकर मेयर पर पिस्टल तान चुका है, जो पार्षदों को देख लेने की धमकी दे चुका है.. जिसे नगर निगम ने होर्डिंग का ठेका देने के लिए ब्लैक लिस्टेड कर दिया था.. खबर चलाई गई... साक्षों को आधार बनवाया गया.. अखबारों की कटिंग को आधार बनाया गया और पूछा गया कि आखिर एक ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार को टेंडर किस आधार पर दिया गया... एक माफिया को मेरठ नगर निगम और यहां का प्रशासन संरक्षण क्यों दे रहा है..?
बस इसी बात से बौखलाकर होर्डिंग माफिया ज्ञानेंद्र चौधरी ने पत्रकार राहुल राणा को पहले तो फोन पर धमकी देना शुरु किया उसके बाद पत्रकार राहुल राणा के परिवार वालों को हानि पहुंचाने के मकसद से कुछ गुर्गों को भी उसके घर पर भेजा.. दहशत में पत्रकार ने इस मामले में स्थानीय थाने में अवगत कराया लेकिन उसके बाद भी धमकियों का सिलसिला जारी रहा गौरतलब है कि माफिया ज्ञानेंद्र चौधरी 2014 में आर्मी तेल चोरी प्रकरण में जेल गया परतापुर में अवैध होटल बनाया, सरकारी जमीन घेरी
भूमाफिया का मुकदमा दर्ज हुआ पूर्व में पार्षद पति पर पिस्टल तानी नगर निगम ने किया ब्लैक लिस्टेड इस पूरे मामले को लेकर पत्रकारों ने ssp से लेकर adg तक शिकायत की है, और मामले में माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है सवाल ये है कि पत्रकार अगर सही खबर नहीं दिखाएंगे तो क्या दिखाएंगे? पत्रकारों को खबर दिखाने पर अगर धमकी मिलेगी तो क्या होगा? ऐसे में कानून व्यवस्था का डंका पीटने वाले प्रशासन और सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है... सवाल है अब आगे पुलिस क्या करेगी
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