मेरठ में अनोखी शादी बनी चर्चा का विषय

 मेरठ जहां एक तरफ दहेज को लेकर शादी टूटना और दहेज उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं तो वहीं मेरठ में एक शादी दहेज लोभियों के लिए तमाचा साबित हुई है। जी हां क्योंकि मेरठ की यह अनोखी शादी बिना दहेज के हुई है।



दरअसल मेरठ के कोतवाली थाना इलाके के पोदीवाड़ा के रहने वाले शिवकुमार नाज वाल्मीकन ने अपने बेटे विशु गहलोत की शादी दिल्ली निवासी चंचल से तय की थी जिसमें शिवकुमार नाज जी ने अपने समधि ज्ञानचंद जी से आग्रह किया कि मैं शादी में कोई भी दान दहेज नही लूंगा बल्कि बहु के रूप में बेटी लूंगा। काफी विचार विमर्श के बाद ज्ञानचंद भी मान गए और फिर बिना दहेज के ये शादी हुई।



शिवकुमार नाज के तीन बेटे हैं और उन्होंने शुरू से ही सोचा था कि वह अपने तीनों बेटों की शादी बिना दान दहेज के करेंगे। लेकिन बड़े बेटे विक्रांत और आकाश के ससुराल वाले नहीं माने तो अब सबसे छोटे बेटे विशु के रिश्ते की बात दिल्ली ज्ञानचंद जी के घर हुई तो उनसे यह पहले ही तय कर दिया गया की शादी में हम कोई भी दान दहेज नहीं लेंगे पहले तो ज्ञानचंद जी ने समाज का हवाला देते हुए कहा कि अगर मैं अपनी बेटी की शादी बिना दान दहेज के करूंगा तो लोग क्या कहेंगे कि मैं अपनी बेटी को कुछ भी नहीं दे पाया। लेकिन फिर शिवकुमार नाज के काफी समझाने के बाद ज्ञानचंद मान गए और उन्होंने दहेज मुक्त शादी का वादा किया और हुआ भी ऐसा ही 14 अप्रैल 2025 को विशु की बारात दिल्ली गई और वहां बिना किसी लेनदेन के यह शादी हुई


बाइट - शिवकुमार नाज (दूल्हे के पिता)



दूल्हे विशु गहलोत का कहना है कि मैं भी बचपन से ही दहेज के खिलाफ हूं और मैं अपने ससुराल पक्ष का सम्मान करता हूं और धन्यवाद करता हूं क्योंकि उन्होंने हमारी इस इच्छा को स्वीकार किया और बिना दहेज के शादी की।


बाइट - विशु गहलोत, दूल्हा



नई नवेली दुल्हन चंचल का कहना है कि यह उन लोगों के मुंह पर तमाचा है जो दहेज के लिए लोगों को परेशान करते हैं और फिर अपनी बहू का उत्पीड़न करते हैं.... लेकिन मैं शादी होने के बाद जब ससुराल आई तो मुझे यहां इतना प्यार इतना मान सम्मान मिला कि मुझे अपने मायके की याद तक नहीं आई.....


बाइट - चंचल (दुल्हन)



चंचल की जेठानी यानी विशु की भाभी संगीता का कहना है कि हमें दान दहेज नहीं बल्कि मेरी देवरानी के रूप में एक छोटी बहन चाहिए थी जो मुझे मिल गई और मेरी देवरानी बहुत अच्छी है शिक्षित है और मेरे ससुराल के लोग भी विशेष कर मेरे ससुर हमें अपनी बेटियों की तरह रखते हैं।


बाइट - संगीता ( चंचल की जेठानी)




वाल्मीकि समाज के वरिष्ठ समाज सेवक रविंद्र वेद वाल्मीकन का कहना है कि जो लोग अपने बच्चों के शादी में दहेज देने के लिए मेहनत करते हैं और पैसे कमाने में अपनी जिंदगी बिता देते हैं उन लोगों को केवल अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और संस्कार देना चाहिए ताकि वह बेटी जिस घर जाए उस घर को स्वर्ग बना दे। और शिवकुमार नाज जी ने यह जो समाज में पहल की है इस पहल को समाज के हर व्यक्ति को अपनाना चाहिए और समाज को दहेज मुक्त शादी करनी चाहिए।



बाइट - रवेन्द्र




वैद वाल्मीकन (वरिष्ठ समाजसेवी)

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